उत्तर: (B) पद्य में छंद, लय और ताल होती है; गद्य में नहीं — पद्य (poetry): छंदबद्ध, लयबद्ध, तुकांत/अतुकांत। गद्य (prose): छंद-मुक्त, सामान्य भाषा। गद्य विधाएँ: कहानी, उपन्यास, निबंध, नाटक। पद्य: कविता, गीत, ग़ज़ल।
जनतंत्र का प्रभु: जनता
जनता को संज्ञा: भीड़
'र' के विभिन्न रूप हैं:
'नयन' का संधि-विच्छेद है:
भारत के राष्ट्रीय ध्वज में 'अशोक चक्र' में कितनी तीलियाँ (spokes) हैं?
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